बचपन याद आता है

मुझे बचपन याद आता है। सुबह सवेरे उठना और नहाना मंदिर में जाना और जल चढाना। पाठशाला का रास्ता, किताबे और बस्ता। मेले में गुब्बारे जलेबी पर मचलना, नहाना नहर में और इमली पर चढ़ना। खरबूजों का खेत अकसर सताता है। मुझे बचपन याद आता है। जुते खेतो में बिचरना, फिसलकर मेड से गिरना, भैय्या … Continue reading बचपन याद आता है

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My affections

My affections for you are fake. May be more fake Than yours are for me. And I feel guilty. Guilt makes me feel good. For if not some love, Some humanity, In this crooked heart, I can carry.

ब्लैक-बोर्ड

खिड़की से वाहर देखा, नजरे दूर तक जाती है। और छितिज पर टिक जाती है। वहा शून्यता का आभाष होता है। और वापस मैं देख लेता हूं, वही ब्लैक-बोर्ड क्लास का। जो रोज कुछ बताता है। क्या है ? क्या ज्ञात है। क्यों है , क्या अज्ञात है। -- जनबरी २०, २००६