Humpty Dumpty

Humpty Dumpty learned caution and care He climbed down the wall. And grew fat in a chair!

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वो आँखे

टखनों पर रखे अपने सर को रोकते अपने कापते हाथो को, उस अँधेरे कमरे में वो आँखे देख रही है, प्रकाश की वो शिखा जो जल रही है उस केरोसीन से जो घर में अब नहीं है बचा। वेदना तो भी दया आती नहीं , देखकर उसकी दशा। जो जी रही है केवल मृत्यु के … Continue reading वो आँखे

बचपन याद आता है

मुझे बचपन याद आता है। सुबह सवेरे उठना और नहाना मंदिर में जाना और जल चढाना। पाठशाला का रास्ता, किताबे और बस्ता। मेले में गुब्बारे जलेबी पर मचलना, नहाना नहर में और इमली पर चढ़ना। खरबूजों का खेत अकसर सताता है। मुझे बचपन याद आता है। जुते खेतो में बिचरना, फिसलकर मेड से गिरना, भैय्या … Continue reading बचपन याद आता है

ब्लैक-बोर्ड

खिड़की से वाहर देखा, नजरे दूर तक जाती है। और छितिज पर टिक जाती है। वहा शून्यता का आभाष होता है। और वापस मैं देख लेता हूं, वही ब्लैक-बोर्ड क्लास का। जो रोज कुछ बताता है। क्या है ? क्या ज्ञात है। क्यों है , क्या अज्ञात है। -- जनबरी २०, २००६